रामू की साहसी यात्रा: जंगल का रास्ता और बुद्धि का बल
पुराने समय में जब सड़कें नहीं थीं और गाड़ियाँ केवल सपनों की बात हुआ करती थीं, तब लोग मीलों का सफर पैदल ही तय किया करते थे। यह कहानी ऐसे ही एक दौर की है, जब इंसान और प्रकृति के बीच का रिश्ता डर और सम्मान दोनों से भरा था।

एक कठिन संकल्प और घना जंगल
रामू नाम का एक सीधा-सादा लेकिन बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति अपने रिश्तेदार के गाँव से वापस अपने घर लौट रहा था। सूरज ढलने में अभी कुछ वक्त बाकी था, लेकिन उसके घर और वर्तमान स्थान के बीच एक विशाल और घना जंगल था। गाँव वालों ने उसे चेतावनी दी थी कि रात होने से पहले जंगल पार कर लेना, क्योंकि अंधेरा होते ही वहाँ जंगली जानवरों का राज हो जाता है।
रामू के पास केवल एक लाठी, थोड़ा सा सत्तू और उसकी सबसे बड़ी ताकत—उसकी चतुराई थी। जैसे ही उसने जंगल में कदम रखा, उसे एहसास हुआ कि यह सफर इतना आसान नहीं होने वाला।

जब सामना हुआ भूखे भेड़िये से
अभी रामू ने आधा ही रास्ता पार किया था कि उसे झाड़ियों में कुछ हलचल सुनाई दी। अचानक एक भूखा भेड़िया उसके सामने आकर खड़ा हो गया। भागना बेकार था क्योंकि भेड़िया उससे कहीं तेज दौड़ सकता था।

रामू की तरकीब:
रामू घबराया नहीं। उसने तुरंत अपने झोले से सत्तू निकाला और उसे दूर एक सूखी झाड़ी की ओर फेंक दिया। भेड़िये का ध्यान भटका और वह खाने की गंध की ओर लपका। इसी बीच, रामू ने बिना शोर मचाए पास के एक घने बरगद के पेड़ पर छलांग लगा दी। वह तब तक ऊपर बैठा रहा जब तक भेड़िया वहां से चला नहीं गया।

गुफा का आसरा और चीते की आहट
रात गहराने लगी थी और जंगल की आवाज़ें डरावनी होने लगी थीं। तभी अचानक आसमान से बारिश होने लगी। रामू को छिपने के लिए जगह चाहिए थी। उसे पास ही एक छोटी सी गुफा दिखाई दी। जैसे ही वह गुफा की ओर बढ़ा, उसे वहां एक चीते के पंजों के ताज़ा निशान दिखे।
रामू समझ गया कि यह किसी शिकारी का घर है। उसने अपनी बुद्धि दौड़ाई और गुफा के अंदर जाने के बजाय, उसके मुहाने पर पड़े बड़े पत्थरों और कटीली झाड़ियों को इस तरह तरतीब से लगाया कि बाहर से देखने पर गुफा बंद और खाली लगे। वह खुद गुफा के एक छोटे से संकरे कोने में दुबक गया जहाँ उसकी गंध बाहर न जा सके। कुछ ही देर में चीता वापस आया, लेकिन प्रवेश द्वार पर झाड़ियाँ देखकर उसे लगा कि यहाँ कोई नहीं है और वह दूसरी ओर निकल गया।

हाथियों का झुंड और आखिरी बाधा
सुबह होने को थी, रामू ने राहत की सांस ली और आगे बढ़ा। लेकिन रास्ते में एक बड़ी नदी थी जहाँ हाथियों का एक झुंड पानी पी रहा था। हाथियों का रास्ता काटना मौत को दावत देना था। रामू चुपचाप एक झाड़ी के पीछे बैठ गया। उसने देखा कि हाथी धीरे-धीरे अपनी मस्ती में चल रहे हैं।
उसने एक तरकीब सोची। उसने सूखी लकड़ियों को आपस में रगड़कर थोड़ा धुआं पैदा किया। हाथियों को जब धुएं की गंध आई, तो वे असुरक्षित महसूस करने लगे और धीरे-धीरे जंगल के दूसरे छोर की ओर चले गए। रास्ता साफ होते ही रामू तेजी से नदी पार कर गया।

घर की चौखट और जीत का अहसास
जैसे ही सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ी, रामू को अपने गाँव की सरहद दिखने लगी। उसके पैर थक चुके थे, कपड़े फट गए थे, लेकिन उसकी आँखों में जीत की चमक थी। जब वह अपने घर पहुँचा, तो उसकी पत्नी और बच्चों ने राहत की सांस ली।
रामू ने सबको बताया कि:
जंगल में केवल ताकत काम नहीं आती, वहाँ वही जीवित रहता है जो अपनी बुद्धि का सही समय पर सही इस्तेमाल करता है।

कहानी की सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों और दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अगर हम धैर्य और चतुराई से काम लें, तो हर संकट से बाहर निकला जा सकता है।
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