🐿️ नटखट गिल्लू और जादुई अखरोट: एक प्यारी गिलहरी की कहानी।
क्या आपने कभी सोचा है कि छोटे-से प्यारे गिलहरी के जीवन में कितने बड़े रोमांच छिपे होते हैं? हमारी कहानी एक ऐसी ही नटखट और उत्सुक गिलहरी की है जिसका नाम गिल्लू था। यह कहानी सिर्फ उसके भाग-दौड़ की नहीं, बल्कि दोस्ती, साहस और एक अनमोल जादुई अखरोट की है।
🌳 गिल्लू का संसार और उसका अनोखा स्वभाव
गिल्लू एक घने, हरे-भरे जंगल के सबसे ऊँचे और सबसे पुराने बरगद के पेड़ पर रहती थी। यह पेड़ जंगल के बीचों-बीच था, जहाँ से उसे चारों ओर का नज़ारा दिखाई देता था।

🌤️ सुबह की शुरुआत और गिल्लू की आदतें
गिल्लू सुबह सबसे पहले जाग जाती थी। सूरज की पहली किरण पड़ते ही, वह अपने छोटे, फुरतीले पैरों से पेड़ की शाखाओं पर दौड़ने लगती थी। उसकी सबसे पसंदीदा चीज़ थी – ताज़े, कुरकुरे अखरोट ढूंढना और उन्हें अपने गालों में भरकर छिपाना।
- उत्सुकता: गिल्लू बहुत उत्सुक थी। वह हमेशा नई चीज़ें सीखना चाहती थी और हर आवाज़ पर कान लगाती थी।
- दोस्त: उसके सबसे अच्छे दोस्त थे, एक बुद्धिमान उल्लू जिसका नाम ‘हु-हु’ था, और एक शर्मीला खरगोश ‘मिठ्ठू’।
🍂 अखरोट का रहस्यमय केंद्र
एक दिन, जब गिल्लू अखरोट जमा कर रही थी, उसने एक बहुत ही अनोखा अखरोट पाया। यह बाकी अखरोटों से थोड़ा बड़ा था और सूरज की रोशनी में हल्का-सा चमक रहा था। गिल्लू ने उसे सबसे सुरक्षित जगह पर, अपनी खोखली डाल के अंदर छिपा दिया। यह अखरोट साधारण नहीं था। हु-हु उल्लू ने गिल्लू को बताया कि यह ‘इच्छापूर्ति अखरोट’ है, जो किसी बहुत ही सच्चे दिल वाले प्राणी को मिलता है।
🧭 जंगल में आया संकट और गिल्लू का साहस
सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी एक दिन जंगल में एक बड़ा संकट आ गया।

🔥 सूखा और भोजन की कमी
गर्मियों के कारण जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। नदियाँ सूखने लगीं और पेड़ों पर फल-अखरोट खत्म होने लगे। सारे जानवर भूखे और उदास थे।
- मिठ्ठू का डर: खरगोश मिठ्ठू इतना डर गया कि उसने खाना ढूंढना ही छोड़ दिया।
- हु-हु की सलाह: उल्लू हु-हु ने बताया कि इस सूखे को केवल शुद्ध और निस्वार्थ इच्छाशक्ति ही दूर कर सकती है।
गिल्लू को तुरंत जादुई अखरोट की याद आई। वह जानती थी कि उसे अब इसका इस्तेमाल करना पड़ेगा। लेकिन किसलिए? खुद के लिए या जंगल के लिए?
🗺️ यात्रा की तैयारी और मुश्किल रास्ते
गिल्लू ने फैसला किया कि वह खुद के लिए अखरोट का इस्तेमाल नहीं करेगी। वह इसे लेकर जंगल के सबसे ऊंचे शिखर पर जाएगी, जहाँ जाकर वह सबकी भलाई के लिए एक इच्छा माँगेगी। यह रास्ता खतरों से भरा था, जिसमें उसे तेज़ हवाओं और मुश्किल चट्टानों से गुज़रना था।
- गिल्लू ने जादुई अखरोट को अपने मुँह में दबाया।
- उसने साहस बटोरकर अपनी यात्रा शुरू की।
✨ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन और जंगल की वापसी
कई मुश्किलों का सामना करने के बाद, गिल्लू आखिरकार पर्वत की चोटी पर पहुँच गई।
🙏 निस्वार्थ इच्छा और जादुई पल
चोटी पर पहुँचकर, गिल्लू ने अपनी आँखें बंद कीं और पूरी ईमानदारी और सच्चे दिल से इच्छा माँगी:
“हे प्रकृति! मैं अपने लिए कुछ नहीं माँगती। बस मेरे प्यारे जंगल के सभी दोस्तों की प्यास बुझा दो, उन्हें फिर से भोजन और खुशियाँ दे दो।”
जैसे ही उसने यह इच्छा माँगी, जादुई अखरोट से एक सुनहरी रोशनी निकली और पूरे जंगल में फैल गई। अखरोट अपनी चमक खो चुका था, लेकिन गिल्लू का दिल खुशी से भर गया था।
🌧️ खुशहाली की वापसी
अगले ही पल, आसमान में घने बादल छा गए और ज़ोरदार बारिश होने लगी। यह कोई साधारण बारिश नहीं थी, बल्कि जीवनदायी वर्षा थी जिसने सूखी धरती को हरा कर दिया। कुछ ही दिनों में, पेड़ों पर फिर से फल-अखरोट उग आए और जंगल के सभी जानवर खुशी से झूम उठे।
🥳 सीख और गिल्लू का सम्मान
गिल्लू ने साबित कर दिया कि सबसे बड़ी शक्ति निस्वार्थता और दूसरों के लिए प्यार में होती है।
जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर गिल्लू का धन्यवाद किया और उसे ‘जंगल की रक्षक’ का नाम दिया। गिल्लू फिर से अपनी शाखाओं पर कूदने लगी, अब वह केवल अखरोट जमा नहीं करती थी, बल्कि सबकी मदद भी करती थी।
नैतिक शिक्षा (Conclusion): यह कहानी हमें सिखाती है कि छोटा होना कोई बाधा नहीं है। यदि हमारे इरादे नेक और दिल सच्चा हो, तो हम दुनिया के सबसे बड़े काम भी कर सकते हैं। सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में है, न कि केवल अपने स्वार्थ को पूरा करने में।
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